जयपुर, 13 फरवरी। राजस्थान में व्यवसाय और आवास से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने केन्द्रीय केबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को पत्र लिखकर कम्पलायंस रिडक्शन एंड डीरेग्यूलेशन के दूसरे चरण की तैयारियों की जानकारी दी है।
राज्य सरकार ने 28 प्राथमिकता और वैकल्पिक क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें निवेश प्रोत्साहन ब्यूरो, उच्च व स्कूली शिक्षा, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, राजस्व, एलएसजी, यूडीएच, रीको, श्रम, उद्योग, पर्यटन, ऊर्जा और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग शामिल हैं।
दूसरे चरण में लाइसेंस की संख्या कम करने, विभागीय अनुमतियों को एकीकृत कर सिंगल विंडो सिस्टम से उपलब्ध कराने, निरीक्षण में कमी, स्व-सत्यापन को बढ़ावा, डिजिटाइजेशन और कर-निश्चितता पर जोर रहेगा।
सबसे बड़ा सुधार लैंड यूज प्रक्रियाओं के सरलीकरण में होगा। मास्टर प्लान में अनुमति होने पर कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग के लिए कन्वर्जन की अनिवार्यता खत्म करने पर विचार हो रहा है। आवासीय और वाणिज्यिक जोन के नियमों में शिथिलता से घर और कार्यस्थल के बीच की दूरी घटेगी, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण में कमी आएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अफोर्डेबल हाउसिंग को नई गति मिलेगी।